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छत्तीसगढ़ शासन की अधिसूचना क्रमांक- 186/2000 एवं वर्ष 2000 द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया है।

 

प्रस्तावना

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छत्तीसगढ़ राज्य में निवासरत अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या एक तिहाई है । राज्य के बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, जशपुर, सरगुजा, कोरिया, कोरबा एवं रायगढ़ जिला पूर्णत: अनुसूचित जनजाति क्षेत्र वाले जिले है । राज्य में अनुसूचित जनजातियों का उल्लेखनीय फैलाव है । वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार राज्य में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या, 66,16,596 है जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का 31.76 प्रतिशत है । प्रदेश में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 88000 वर्ग कि.मी. (65.12 प्रतिशत) आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में अवस्थित है ।

संविधान के अनुच्छेद 266 में परिभाषित करते हुए उल्लेख है अनुसूचित जजनातियों से अभिप्राय है । ऐसी जनजातियां या जनजाति समुदाय या ऐसी जनजातियाें या जनजाति समुदाय के भाग या उसमें के युथ जो इस संविधान के प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 342 के अधीन अनुसूचित जनजातियों समझी जाती है । संविधान के अनुसूचित जनजाति आदेश 1950 के तहत इस राज्य के लिये 42 अनुसूचित जनजातियां घोषित की गई है । जिसमें से अत्यंत पिछड़ी जनजाति बैगा, बिरहोर, अबुझमाड़िया कमार, पहाड़ी कोरवा जनजाति है ।

 

अनुसूचित जाति/जनजातियों के लिए भारतीय संविधान में कानून

भारत वर्ष में अनुसूचित जाति/जनजातियों के लिए भारतीय संविधान में 03 बड़े कानून बनाये गये है:-

1. सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1055 तथा सिविल अधिकार नियम 1977.
2. अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण 1090 के अंतर्गत अनुसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निवारण) नियम 1995
3 अनुसूचित जाति/जनजाति को शासकीय सेवा में आरक्षण अधिनियम 1994 तथा नियम 1998 उपरोक्त अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत प्रावधानों के उनरूप प्रदेश के अनुसूचित जाति/जनजाति सदस्यों के विकास एवं हितों के संरक्षण के प्रति आयोग सक्रियता और सक्षमता के साथ अपने दायित्वों का यथार्थ निर्वहन कर रहा है ।